नई दिल्ली. पाकिस्तानी अख़बार DAWN की वेबसाइट पर गूगल एड की वजह से दिखे नीतीश कुमार के चुनावी विज्ञापन को मुद्दा बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल से 2014 के लोकसभा चुनाव में सबको चौंका देने वाली बीजेपी और उसके वरिष्ठ नेता सुशील मोदी की सोशल मीडिया पर जमकर खिल्ली उड़ाई जा रही है. गूगल एड पाठकों को उनके लोकेशन के हिसाब से एड दिखाता है भले ही साइट किसी भी देश की हो.

सोशल मीडिया और तकनीक के इस्तेमाल से 2014 के लोकसभा चुनाव में विरोधियों को भौंचक्का कर देने वाली बीजेपी के लिए ये मसला इस समय सोशल मीडिया पर एक क्राइसिस की शक्ल अख्तियार कर चुका है. सोशल मीडिया पर लोग बीजेपी वालों को गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई से इसे समझने की नसीहत दे रहे हैं.

सुशील मोदी के ट्वीट को बीजेपी ने सुधारने के बदले दोहरा दिया

सबसे पहले बिहार में बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने शुक्रवार की शाम 7.07 बजे डॉन की वेबसाइट पर नीतीश के विज्ञापन के स्क्रीनशॉट को ट्वीट करते हुए नीतीश कुमार से पूछा, “पाकिस्तान के प्रमुख अख़बार”डॉन” के ई-अखबार में नीतीश कुमार आखिर किस मतदाता को लुभाने के लिए अपना विज्ञापन दे रहे हैं?”

सुशील मोदी के इस ट्वीट पर बीजेपी समर्थकों ने तो नीतीश कुमार की आलोचना शुरू कर दी लेकिन कई लोगों ने सुशील मोदी को ट्वीट पर बताया कि ये गूगल एड सेंस का तकनीकी मसला है जिसकी वजह से नीतीश का विज्ञापन पाकिस्तान की साइट पर दिख रहा है इसलिए वो ट्वीट डिलीट कर लें. लेकिन ये ट्वीट ख़बर लिखे जाने तक बना हुआ है.

हद तो तब हुई जब सुशील मोदी के इसी ट्वीट के आधार पर उनके ट्वीट के करीब 3 घंटे 23 मिनट बाद बीजेपी के ऑफिसियल ट्वीटर हैंडल से रात 10.30 बजे उसी स्क्रीनशॉट के साथ वही सवाल दुहरा दिए गए. सोशल मीडिया पर लोगों ने इसका सीधा मतलब ये निकाला कि सुशील मोदी को ये पता नहीं है कि गूगल कैसे काम करता है और बीजेपी का ट्वीटर हैंडल करने वाले लोगों ने भी इस गलती को सुधारने के बदले उसे रिपीट कर दिया.

समाचार लिखे जाने वक्त तक सुशील मोदी और बीजेपी दोनों के ऑफिसियल ट्वीटर हैंडल पर दोनों ट्वीट पड़े हुए हैं और यूजर दोनों एकाउंट को लगातार ये ट्वीट डिलीट करने की सलाह दे रहे हैं. बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने भी यही ट्वीट किया था लेकिन लोगों ने जब उन्हें गूगल एड की कहानी समझाई तो उन्होंने वो ट्वीट डिलीट कर लिया.

कैसे काम करता है गूगल एड, ये समझ लीजिए

गूगल एड किसी भी पाठक के आईपी एड्रेस, करेंट लोकेशन और इंटरनेट पर उसकी खोज की आदतों के हिसाब से उसे हर तरह की वेबसाइट पर विज्ञापन दिखाता है. कोई भी वेबसाइट गूगल एड को सिर्फ अपना स्पेस बेचती है. इस स्पेस में कौन सा विज्ञापन दिखेगा ये गूगल उस यूजर के लोकेशन, सर्च वगैरह की आदतों के हिसाब से तय करता है.

मसलन अगर आपने दिल्ली से पटना के लिए हवाई जहाज की टिकट बुक की है तो आगे आप कोई दूसरी साइट भी देख रहे होंगे तो आपको उस साइट पर दिल्ली से पटना के सस्ते हवाई किराए का एड दिखने लगेगा. अगर आप ऑनलाइन कपड़े खरीद रहे हैं तो आपको आगे किसी भी वेबसाइट को देखते वक्त गूगल कपड़े बेचने वाली कंपनियों को विज्ञापन दिखाने लगेगा.

इसलिए जब कोई यूजर पाकिस्तानी अखबार डॉन की साइट भारत के किसी शहर से देख रहा है तो उसे नीतीश के विज्ञापन दिख रहे हैं. कई लोगों को डॉन की ही साइट पर बीजेपी का भी विज्ञापन दिखा है. भारत से न्यूयॉर्क टाइम्स या सिडनी टाइम्स पढ़ रहे यूजर को उनकी साइट पर भी ये विज्ञापन दिख सकते हैं क्योंकि इन  विज्ञापनों के दिखने का संबंध यूजर के लोकेशन से है, न कि साइट की लोकेशन से.