नई दिल्ली. बिहार में दो चरण के मतदान के बाद भी एनडीए के पक्ष में कोई लहर न दिखने से चिंतित भारतीय जनता पार्टी ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बिहार के बचे हुए तीन चरण के चुनाव में 13 नंबर का टोटका अपनाने का मन बना लिया है.
 
सूत्रों का कहना है कि बिहार चुनाव के बचे तीन चरणों के मतदान में बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी की कुल 13 सभाएं करवाएगी. मोदी की आगे की रैलियों की संख्या की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन चर्चा तेज है कि पार्टी 13 का मास्टरस्ट्रोक लगाने वाली है.
 
बीजेपी के लिए क्यों इतना खास है 13 नंबर ?
 
बीजेपी के लिए 13 नंबर का महत्व पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल स्थापित हुआ. 1996 में वाजपेयी की पहली सरकार मात्र 13 दिन में गिर गई थी. 1998 में जब दोबारा वाजपेयी की सरकार बनी तो वो 12वीं लोकसभा थी और वो सरकार भी महज 13 महीने ही चल सकी. 
 
1999 में 13वीं लोकसभा के चुनाव में वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की जीत हुई और सरकार बनी. वाजपेयी ने इस सरकार की कमान संभालने के लिए 13 अक्टूबर का दिन चुना और उस दिन ही शपथ ली. यहां तक कि बिहार में विधान परिषद की लोकल बॉडी कोटे की 24 सीटों के लिए जुलाई में हुए चुनाव में भी बीजेपी ने 13 सीटें जीती थीं.
 
13 तारीख को ही नरेंद्र मोदी बने थे पीएम कैंडिडेट
 
और, नरेंद्र मोदी के लिए भी 13 नंबर अनलकी साबित नहीं हुआ. बीजेपी ने 13 सितंबर, 2013 को ही उन्हें प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया था और 13 का जादू कहिए कि मोदी न सिर्फ सरकार बनाने में कामयाब रहे बल्कि बीजेपी अपने दम पर बहुमत हासिल कर ली.