पटना. सितंबर-अक्टूबर के महीने में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव को मिनी लोकसभा चुनाव माना जा रहा है. पीएम मोदी की बिहार रैली से स्पष्ट से हो गया है कि मुकाबला नीतीश बनाम मोदी होगा. नरेंद्र मोदी बिहार में जंगलराज की बात कर रहे हैं तो नीतीश कुमार अपने विकास पुरुष की छवि को लेकर मैदान में कूद पड़े हैं. सीएम नीतीश का दावा है कि पिछले दस सालों में बिहार राज्य बीमारू की श्रेणी से बाहर निकलकर विकास के पथ पर अग्रसर है.

आइये जानते हैं नीतीश सरकार की दस बड़ी सफलताएं.

महिला आरक्षण- नवंबर 2005 में बनी बिहार की नीतीश सरकार ने साल 2006 में ही पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था. ऐसा करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना.

बिजली- बिजली उत्पादन और वितरण के मामले में बिहार सरकार ने काफी तरक्की की है. अब हर गांव में बिजली पहुंच रही है. पहले की तुलना में राज्य में बिजली उत्पादन बढ़ा है. राज्य में बिजली की उपलब्धता 1,800 मेगावॉट से बढ़कर 2,335 मेगावॉट पहुंच गई है. साथ ही, सितंबर 2014 में यह उपलब्धता 2,800 मेगावॉट तक हो गई थी.

सड़क- किसी भी राज्य के विकास में सबसे बड़ा योगदान सड़कों का होता है. बिहार सरकार ने सड़कों का जाल बिछाने का उल्लेखनीय काम किया है. जिसकी वजह से अधिकांश प्रखंडों को जिला मुख्यालय और जिलों को राजधानी से जोड़ने का काम हुआ है. यह जरूर है कि राष्ट्रीय राजमार्गो के विकास को लेकर जो रफ्तार दिखनी चाहिए, वह संभव नहीं हो पा रही.

कानून-व्यवस्था- पूर्व सैनिकों को नौकरी देने के लिए राज्य सरकार ने सैप (स्पेशल आग्जीलियरी पुलिस) का गठन किया है, इससे कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है. साथ ही, भारत में बिहार एक मात्र ऐसा राज्य है जहां सबसे ज्यादा फास्ट ट्रैक अदालतें काम कर रही हैं. 2013 में इनकी संख्या 183 थी. बिहार में फास्ट ट्रैक अदालतों ने वर्ष 2006 से 75 हजार लोगों को दोषी करार दिया है.

महिला सशक्तिकरण- राज्य में कन्या साइकिल योजना को विकास का पहिया कहा गया है. राज्य सरकार के अनुसार नौ लाख से ज्यादा लड़कियों को स्कूल जाने के लिए मुफ्त में साइकिल दिया गया है. इसके अलावा यहां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना और बालिका पोशाक योजना से भी सुधार हुआ है.

कृषि- बिहार में अधिकतर लोग खेती पर ही निर्भर है. सरकार के प्रोत्साहन से उपज व उत्पादकता दोनों बढ़े. सरकार ने समेकित कृषि (खेती के साथ मत्स्य पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, जैविक सब्जी उत्पादन करना समेकित खेती कहलाता है) को बढ़ावा देते हुए लोगों को मुर्गी पालन, मछली पालन, सूअर पालन आदि के लिए ट्रेनिंग दी और इससे उन्हें बहुत फायदा हुआ.

स्वास्थ्य- राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का नतीजा है कि सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाले रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है. वर्ष 2007 में सरकारी अस्पतालों में प्रति माह औसत 3077 रोगी आते थे. वर्ष 2013 इनकी संख्या बढ़कर 11, 464 हो गई. राज्य के पिछड़े ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सुविधा का विस्तार करते हुए सभी प्रखंडों में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया गया है.

शिक्षा– राज्य सरकार के प्रयासों से बच्चों में स्कूल जाने के प्रति रुझान बढ़ा है. पिछले एक दशक में बिहार में साक्षरता वृद्धि की दर 17 प्रतिशत हो गई है. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मोतिहारी और गया में केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की योजना प्रस्तावित. साथ ही, प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू हो चुकी है. इसके अलावा 2008 में आईआईटी पटना की स्थापना हुई. बहुत ही कम समय में आईआईटी पटना ने अपनी पहचान बना ली है.

भूमि सुधार- भूमि विवाद जल्द निपटाने के लिए बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 राज्य में लागू किया है. इसके अलावा हवाई फोटोग्राफी के माध्यम से डिजिटल मानचित्र तैयार कर जमीनी सत्यापन के बाद खतियान तैयार किया जा रहा है. औद्योगिक जमीन की भारी किल्लत से निपटने के लिए राज्य सरकार लोगों से जमीन खरीदकर औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करेगी.

ब्रिजमेकर– सरकार ने रोड कनेक्टिविटी के लिए सबसे महत्वपूर्ण पुलों के निर्माण को सर्वाधिक प्राथमिकता दी है. गंगा नदी पर दो, कोसी पर दो, गंडक पर दो और सोन नदी पर एक बड़े सेतु का निर्माण चल रहा है.