पटना. बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को वर्ष 1989 में हुए भागलपुर दंगे की जांच रिपोर्ट सदन पटल पर रखा गया. जांच रिपोर्ट में इस दंगे के लिए जहां तत्कालीन 125 अधिकारियों को दोषी पाया है वहीं बिहार सरकार को कई सुझाव भी दिए गए हैं. भागलपुर दंगे की जांच के लिए नीतीश सरकार ने वर्ष 2006 में सेवानिवृत न्यायाधीश एनएन सिंह की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया था.

इस दंगे में सरकारी आंकड़ों के अनुसार भागलपुर शहर और तत्कालीन भागलपुर जिले के 18 प्रखंडों के 194 गांवों के ग्यारह सौ से ज़्यादा लोग मारे गये थे.
जस्टिस एनएन सिंह रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर 24 अक्तूबर से 27 अक्तूबर, 1989 के बीच भागलपुर और सीमावर्ती जिलों में हुए सांप्रदायिक दंगों के लिए तत्कालीन सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. तब बिहार में कांग्रेस की सरकार थी और सत्येंद्र नारायण सिन्हा मुख्यमंत्री थे. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस सरकार ने सबूत होने के बावजूद दंगाइयों को छोड़ा और कई पुलिस अधिकारियों ने धार्मिक आधार पर भेदभाव किया. रिपोर्ट में भागलपुर में तब तैनात अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है. रिपोर्ट में भागलपुर के तत्कालीन ग्रामीण एसपी शीलवर्धन सिंह के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है. वर्तमान में एसपी सिंह केंद्र सरकार के अधीन काम कर रहे हैं. उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए नीतीश सरकार ने मोदी सरकार को लिखा है. 

आयोग ने नौ वर्षो के बाद इस वर्ष 28 फरवरी को जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी. सदन पटल पर रखे गए जांच रिपोर्ट में ऐसे 85 परिवारों की पहचान की गई है जिन्होंने दंगों के बाद भागलपुर से औने-पौने दामों पर जमीन और घर बेच कही अन्यत्र चले गए हैं. रिपोर्ट में ऐसे लोगों को सरकार द्वारा फिर से भागलपुर में बसाने की अनुशंसा की गई है.

रिपोर्ट में इस दंगे के लिए तत्कालीन भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी सहित 125 अधिकारियों की भी पहचान की गई है जो इस दंगे के लिए दोषी हैं. रिपोर्ट में कहा गया है इनमें से कई अधिकारी अब बिहार के अलावे अन्य राज्यों में हैं या फिर सेवानिवृत हो चुके हैं.

रिपोर्ट पेश होने के बाद सरकार की ओर से तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई परंतु मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता सुशील कुमार मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा. मोदी ने कहा कि रिपोर्ट से स्पष्ट है कि कांग्रेस और राजद ने दंगाइयों को बचाने का काम किया है तभी 85 परिवार यहां से चले गए. उन्होंने नीतीश से पूछा कि अब सरकार ऐसे लोगों पर क्या कारवाई करेगी. (एजेंसी इनपुट के साथ)