नई दिल्ली. यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्रतीक है. हिन्दू धर्म में जितना महत्व यज्ञ को दिया गया है उतना ओर किसी को नहीं दिया गया. हमारा कोई भी शुभ अशुभ धर्म कार्य इसके बिना पूरा नहीं होता. जन्म से मृत्यु तक सभी संस्कारों में यज्ञ आवश्यक है. हमारे धर्म में वेदों का जो महत्व है वही महत्व यज्ञों को भी प्राप्त है क्योंकि वेदों का प्रधान विषय ही यज्ञ है. 
 
वेदों में यज्ञ के वर्णन पर जितने मंत्र हैं उतने अन्य किसी विषय पर नहीं. यदि यह कहा जाये कि यज्ञ वैदिक धर्म का प्राण है तो इसमें भी अत्युक्ति नहीं. वैदिक धर्म यज्ञ प्रधान धर्म है. यज्ञ को निकाल दें तो वैदिक धर्म निष्प्राण हो जायेगा. यज्ञ से ही समस्त सृष्टि उत्पन्न हुई. भगवान स्वयं यज्ञ रूप हैं और तदुत्पन्न सम्पूर्ण सृष्टि भी यज्ञ रूप है तो यज्ञ के अतिरिक्त संसार में कुछ है ही नहीं. चारों वेद भी इस यज्ञ रूप भगवान से उत्पन्न हुए है, अतः यह भी यज्ञ रूप है और उनमें जो कुछ भी है वह भी यज्ञ के अतिरिक्त और कुछ नहीं है.