‘अर्ध’ शब्द का अर्थ होता है आधा. इसी कारण 12 वर्षों के अंतराल में आयोजित होने वाले पूर्ण ‘कुंभ’ के बीच छह वर्ष के बाद आयोजित होने वाले कुंभ को ‘अर्ध कुंभ’ कहा जाता है.

अर्ध कुंभ मेले का पौराणिक महत्त्व है. ज्योतिषियों के अनुसार कुंभ का असाधारण महत्व बृहस्पति के कुंभ राशि में प्रवेश तथा सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ जुड़ा है.

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