नई दिल्ली. वेद प्राचीन भारत के वैदिक काल की वाचिक परम्परा की अनुपम कृति है जो पीढी दर पीढी पिछले चार-पांच हज़ार वर्षों से चली आ रही है. वेद ही हिन्दू धर्म के सर्वोच्च और सर्वोपरि धर्मग्रन्थ हैं. वेद के असल मन्त्र भाग को संहिता कहते हैं. वेदों में सर्वप्रथम ऋग्वेद का निर्माण हुआ. यह पद्यात्मक है. यजुर्वेद गद्यमय है और सामवेद गीतात्मक है.

यजुर्वेद:

  • यह वेद मुख्यतः क्षत्रियो के लिए होता है. यजुर्वेद के दो भाग हैं:
  • कृष्ण: वैशम्पायन ऋषि का सम्बन्ध कृष्ण से है. कृष्ण की चार शाखाएं हैं.
  • शुक्ल: याज्ञवल्क्य ऋषि का सम्बन्ध शुक्ल से है. शुक्ल की दो शाखाएं हैं. इसमें 40 अध्याय हैं. यजुर्वेद के एक मन्त्र में ‘ब्रीहिधान्यों’ का वर्णन प्राप्त होता है. इसके अलावा, दिव्य वैद्य एवं कृषि विज्ञान का भी विषय समाहित है.

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