नई दिल्ली. पुरुषार्थ, दो शब्द पुरुष और अर्थ से मिलकर बना है. इसका अर्थ यह निकाला जाता है कि मानव को ‘क्या’ प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए. हिन्दू धर्म में पुरुषार्थ से तात्पर्य मानव के लक्ष्य या उद्देश्य से है.

प्रायः मनुष्य के लिए वेदों में चार पुरुषार्थों का नाम लिया गया है – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष. योग वसिष्ट के अनुसार सद्जनों और शास्त्र के उपदेश अनुसार चित्त का विचरण ही पुरुषार्थ कहलाता है. (वीडियो में देखिए भारत पर्व…)