नई दिल्ली. सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है. हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया. धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है. भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस्कारों का महती योगदान है.
 
आज हमारे ऋषि-मुनियों ने सभी संस्कारों को वैज्ञानिक कसौटी पर कसने के बाद ही प्रारम्भ किया है. कर्णवेध संस्कार का आधार बिल्कुल वैज्ञानिक है. बालक की शारीरिक व्याधि से रक्षा ही इस संस्कार का मूल उद्देश्य है. प्रकृति प्रदत्त इस शरीर के सारे अंग महत्वपूर्ण हैं. कान हमारे श्रवण द्वार हैं. कर्ण वेधन से व्याधियां दूर होती हैं तथा श्रवण शक्ति भी बढ़ती है. इसके साथ ही कानों में आभूषण हमारे सौन्दर्य बोध का परिचायक भी है.
 
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