नई दिल्ली. दिल्ली में मौजूद पीने का पानी तेजी से ख़तम हो रहा है. पिछले साल के मुकाबले यहां का भूजल स्तर साढ़े तीन मीटर तक नीचे चला गया है. राजधानी के कई इलाकों में जमीन के नीचे 75 मीटर तक पानी का नामोनिशान नहीं है. भूजल के लगातार हो रहे अवैध दोहन और वर्षा जल संचयन में सरकार की नाकामी के चलते धरती सूख रही है. दिल्ली की इस हालत पर केंद्रीय भूजल नियंत्रण बोर्ड भी हैरत में है. उधर केजरीवाल सरकार इस समस्या को लेकर क्या करने वाली है यह स्पष्ट नहीं हो पाया है.

मुफ्त पानी का वादा करने वाली केजरीवाल सरकार में भूजल स्तर की जानकारी के लिए बोर्ड द्वारा राजधानी में 116 जगहों पर बनाए गए वेल (कुओं) में से 86 फीसद में पानी नीचे चला गया है. इसमें दिल्ली के तमाम इलाकों में बनाए गए वेल शामिल हैं. चिंताजनक बात यह है कि दक्षिणी और दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली में भूजल का स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है. दक्षिणी दिल्ली के आया नगर में और दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली के कापसहेड़ा में वेल का पानी सूख गया है. इसके चलते इन इलाकों में पानी का बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है. यदि सरकार और सरकारी एजेंसियां अब भी सचेत नहीं हुई और यही हालत रही तो आने वाले दिनों में पर्यावरण संतुलन के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है. ऐसे में लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस जाएंगे.

केंद्रीय भूजल बोर्ड की 31 मई को आई रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल मई में कापसहेड़ा में भूजल का स्तर 74.41 मीटर था. जबकि इस बार वहां वेल का पानी सूख गया है. इसके चलते वहां 80 मीटर पर भी साफ पानी मिलेगा या नहीं यह खतरा उत्पन्न हो गया है. आया नगर में पिछले साल गर्मी में भूजल स्तर 45.72 मीटर था, इस बार यहां भी धरती सूख गई है.

जानिए क्या है स्थिति
शेष 114 जगहों में से 46 जगहों पर भूजल एक मीटर से लेकर 3.55 मीटर तक नीचे चला गया है. सबसे अधिक नई दिल्ली के नेहरू पार्क में 3.55 मीटर, पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी में 3.37 मीटर, दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली के पूसा में 2.91 मीटर, छावला में 2.21 मीटर, द्वारका में 1.98 मीटर, दिल्ली कैंट के किब्री प्लेस में 1.62 मीटर, नजफगढ़ में 1.48 मीटर, दक्षिणी दिल्ली के जमाली कमाली में 3.05 मीटर, असोला में 2.11 मीटर, भाटी माइंस में 1.11 मीटर, सुलतानपुर में 1.22 मीटर, जौनापुर में 2.11 मीटर, सतबारी में 2.57 मीटर, झीलकोह में 2.1 मीटर और हौज खास में 1.17 मीटर पानी नीचे चला गया है.

भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण बनी स्थिति
बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार पिछले साल मानसून में कम बारिश होने, भूजल के अत्यधिक दोहन व वर्षा जल संचयन की समुचित व्यवस्था नहीं होने के चलते यह स्थिति बनी है. दक्षिणी दिल्ली और दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में पानी के लिए ट्यूबवेल का इस्तेमाल किया जाता है. इसके चलते इन इलाकों में भूजल का स्तर काफी नीचे गिर चुका है. दक्षिणी दिल्ली के पुष्प विहार में भूजल स्तर 62.22 मीटर, जौनापुर में 60.6 मीटर, सुलतानपुर में 56.97 मीटर, असोला में 51.83 मीटर, गदाईपुर में 48.55 मीटर, सतबारी में 47.78 मीटर तक नीचे पहुंच गया है.

IANS से भी इनपुट