नई दिल्ली. यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चार साल में सातवीं बार अपनी कैबिनेट का विस्तार किया है. कौमी एकता दल के साथ विलय के मुद्दे पर पार्टी में हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद हुए इस कैबिनेट विस्तार में दो कैबिनेट और दो स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई गई.
 
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जिन बलराम यादव को मुख्तार अंसारी की पार्टी से विलय के बाद कैबिनेट से बर्खास्त किया गया था, उन्हें दोबारा कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई गई. इसके अलावा अक्टूबर 2015 में अखिलेश यादव सरकार से बर्खास्त किए गए नारद राय को भी फिर से कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से विधायक शारदा प्रताप शुक्ला और लखनऊ सेंट्रल से विधायक रविदास मेहरोत्रा को स्वतंत्र प्रभार वाला राज्यमंत्री बनाया गया है. 
 
कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मनोज पांडेय को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था. आज के विस्तार में बलिया की सिकंदरपुर सीट से विधायक जियाउद्दीन रिजवी को भी कैबिनेट मंत्री बनाया जाना था, लेकिन जियाउद्दीन रिजवी बाहर गए हुए हैं, इसलिए वो शपथ नहीं ले सके. 
 
अखिलेश यादव सरकार में शामिल चार नए मंत्रियों में एक यादव, एक ब्राह्मण, एक भूमिहार और एक पंजाबी खत्री हैं. कैबिनेट विस्तार में जातिगत समीकरणों के अलावा जिस बात पर यूपी में राजनीतिक हलचल मची, वो थी शपथ ग्रहण समारोह से शिवपाल यादव की गैर मौजूदगी. 
 
शिवपाल की मौजूदगी में ही कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय का ऐलान हुआ था, जिस पर अखिलेश यादव ने अपनी नाराजगी जताई थी. अखिलेश यादव के वीटो करने की वजह से ही 25 जून को समाजवादी पार्टी संसदीय बोर्ड ने कौमी एकता दल के विलय को नामंजूर कर दिया था.
 
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अखिलेश सरकार के कैबिनेट विस्तार का क्या मतलब में है और शपथ ग्रहण में मंत्री शिवपाल यादव क्यों नहीं पहुंचे. इंडिया न्यूज के खास शो ‘बीच बहस में’ इन्हीं अहम सवालों पर पेश है चर्चा.
 
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