नई दिल्ली. पूरे देश में भीषण गर्मी ने हाहाकार मचा रखा है. लोग लू के थपेड़ों से हलकान हैं और राहत मिलने के आसार दूर-दूर तक नहीं दिख रहे. पीने के पानी की किल्लत और 40 डिग्री पार तापमान की दोहरी मार अब तक करीब दो सौ लोगों की जान ले चुकी है.
 
गर्मी से होने वाली मौतों के ये सरकारी आंकड़े गर्मी की मार को बयां कर रहे हैं. सरकार खुद कबूल कर चुकी है कि देश के 250 से ज्यादा ज़िलों में सूखा पड़ा है और वहां पीने का पानी भी करीब-करीब खत्म हो चुका है.
 
शहरी इलाकों में लोग प्यास बुझाने के लिए सड़क किनारे रेहड़ी-ठेलों का पानी पी रहे हैं या फिर आइसक्रीम और जूस का सहारा ले रहे हैं. प्यास बुझाने की बेबसी के आगे सेहत की चिंता बौनी साबित हो रही है. 
 
सवाल ये है कि जब सरकारों को गर्मी और सूखे की सच्चाई पता है, तो इससे निपटने के इंतज़ाम क्यों नहीं किए जा रहे? गर्मी की मार के आगे सरकार लाचार क्यों है?
 
इंडिया न्यूज के खास शो ‘बीच बहस में’ गर्मी की मार पर पेश है बड़ी चर्चा.
 
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