नई दिल्ली. रेल मंत्री सुरेश प्रभु का पिटारा आज लोकसभा में खुला. किसी को अपने शहर के लिए नई ट्रेन की उम्मीद थी, तो किसी को कन्फर्म टिकट की. कोई सुरक्षित यात्रा की उम्मीद पाले बैठा था, तो किसी की चाहत थी कि प्रभु इस बार रेल का सफर सुविधा संपन्न बना दें.

आमतौर पर हर रेल बजट से लोगों की उम्मीदें ऐसी ही होती हैं. इस बार रेल मंत्री ने जो बजट पेश किया, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शानदार बताया और विपक्ष के नेता इसमें मीन-मेख निकाल रहे हैं. लेकिन, जनता क्या सोचती है. खासकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और लखनऊ जैसे शहरों की जनता, जिनके लिए रेल अब कमाई, पढ़ाई, दवाई के लिए लाइफ लाइन है.

आज बीच बहस का सवाल यही है कि दिल्ली-मुंबई पर कितनी हुई प्रभु की कृपा और लखनऊ-कोलकाता को रेल बजट में क्या मिला ?

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