नई दिल्ली. पुलिस का काम वर्दी की हनक से चलता है. ये वर्दी का इकबाल ही है कि उसे पहनकर एक आम इंसान सैकड़ों-हजारों लोगों से कानून का पालन कराता है. लेकिन, महाराष्ट्र के लातूर में भीड़ ने एक पुलिस अफसर पर सिर्फ इसलिए हमला कर दिया, क्योंकि वो अपना फर्ज निभा रहा था.

56 साल के एएसआई ने शिवाजी जयंती के नाम पर लातूर के संवेदनशील इलाके में जुलूस निकाल रही भीड़ को रोका था. जवाब में अगले दिन सुबह करीब डेढ़ सौ लोगों के झुंड ने पुलिस पर हमला किया.

एक हेड कांस्टेबल को पीटा और मौके पर पहुंचे एएसआई यूसुफ शेख पर जानलेवा हमला किया. हद तो ये कि भीड़ ने एएसआई को भगवा झंडा थमाकर जुलूस भी निकाला. इस मामले को महाराष्ट्र सरकार ने गंभीरता से लिया है, लेकिन ये सवाल अब बीच बहस में है कि ऐसे लफंगों को बेखौफ होने का हौसला कहां से मिला ?

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