नई दिल्ली. जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी की घटना हुए पूरे दस दिन हो गए हैं. इन दस दिनों में पूरे मामले पर जमकर सियासत हुई और अभी भी हो रही है. सरकार का कहना है कि देश के खिलाफ नारेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, तो विपक्ष का कहना है कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है.

सवाल उठता है कि देश-विरोधी नारों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में इतना मतभेद क्यों हैं ? क्या 9 फरवरी को जो कुछ भी जेनएयू में हुआ उसे देश-विरोधी नहीं माना जाए ? सवाल ये भी है कि अगर 9 फरवरी को जेएनयू में नारे लगाने वाले लोग खुद को देशद्रोही नहीं, देशभक्त समझते हैं. तो देश के कानून से फरार क्यों हैं ?

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