नई दिल्ली. तीन तलाक और चार शादियों के मसले को लेकर देश में कई बार गरमा-गरम बहस हो चुकी है लेकिन मुस्लिम महिलाओं के बराबरी के हक को लेकर अभी तक एक राय नहीं बन पाई है.
 
अब खुद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया है और तीन बार तलाक बोलकर शादी खत्म करने के मसले पर सुनवाई शुरू हो चुकी है. कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित मुस्लिम संगठनों से इसे लेकर जवाब मांगा है. 
 
हलांकि इससे पहले मुस्लिम समुदाय के भीतर के ही कई महिला संगठन इसे लेकर आवाज उठा चुके हैं. पिछले महीने ऐसे ही एक संगठन पीएम मोदी को भी खत लिखा था लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की इस मामले में दखल के बाद ये बहस तेज हो गई है कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने में मुस्लिम धर्मगुरुओँ को आखिर क्या आपत्ति है ?