नई दिल्ली. आयुर्वेद, सदियों से हिंदुस्तानी संस्कृति का हिस्सा है. हिंदू हो या मुसलमान, घर-घर में आयुर्वेदिक दवाओं का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है, और इन पर भरोसा किया जाता है. लेकिन अब इस भरोसे को तोड़ने की कोशिश की जा रही है. तमिनलाडु के एक मुस्लिम संगठन ने पतंजलि आयुर्वेद की दवाओं के खिलाफ फतवा जारी कर दिया है. संगठन ने इन दवाओं को मुसलमानों के लिए हराम करार दिया है. 
 
दलील दी है कि इन दवाओं और प्रॉडक्ट में गो-मूत्र का इस्तेमाल किया गया है. कुछ साल पहले दवाओं में इंसानी हड्डियों के इस्तेमाल को लेकर भी बाबा रामदेव पर आरोप लगे थे. अब गोमूत्र के नाम पर ये नया विवाद खड़ा हो रहा है.
 
सवाल उठता है कि क्या धर्म के नाम पर बीमारियों और दवाओं का भी बंटवारा होगा? क्या बाबा रामदेव के खिलाफ फिर से कोई साजिश रची जा रही है?