नई दिल्ली. देश की आज जो भी शक्ल है उसमें सरदार वल्लभ भाई पटेल का बड़ा योगदान है. वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर कहते हैं कि आज हिंदुस्तान की जो भी शक्ल उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक दिखती है, वह सरदार पटेल की कोशिशों का नतीजा है.
 
इंडिया न्यूज शो ‘अर्ध सत्य’ में इंडिया न्यूज के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत बताते हैं कि आजादी के बाद भारत में जवाहर लाल नेहरु और सरदार पटेल के बीच कुछ विवाद थे. लेकिन ये व्यक्तिगत नहीं थे बल्कि बड़ी और अहम नीतियों के स्तर पर थे.
 
इसे कश्मीर के मसले से समझा जा सकता है. यहां जब कश्मीर के राजा हरिसिंह ने विलय पत्र सौंपा तो 24 अक्टूबर 1947 को गवर्नर जनरल लॉर्ड माऊंटबेटन ने नेहरु और पटेल से मीटिंग के दौरान कहा कि यहां शांति स्थापित होने पर जल्द विलय के लिए जनमत संग्रह किया जाना आवश्यक है.
 
इस समय पटेल जनमत के लिए तैयार नहीं थे लेकिन इस मीटिंग के हफ्तेभर बाद 2 नवंबर 1947 को नेहरु ने रेडियो के जरिए ऐलान कर दिया कि हम इस बात के लिए तैयार है कि जब जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित हो जाए तो संयुक्त राष्ट्र की देख-रेख में जनमत संग्रह किया जाएगा. इस समय पटेल नहीं चाहते थे कि संयुक्त राष्ट्र की देख-रेख में ऐसा कुछ हो क्योंकि तब कश्मीर में भारतीय सेना पाकिस्तान के खिलाफ लड़ रही थी.
 
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