नई दिल्ली. मुंबई के डॉक्टर जाकिर नाईक आजकल अचानक से सुर्खियों में आ गए हैं. जाकिर नाईक पेशे से डॉक्टर हैं, लेकिन वे अब डॉक्टरी छोड़कर इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने लगे हैं. भाषण देने का उनका अंदाज इतना निराला है कि युवा मुसलमानों को नाईक में एक बहुत बड़ा इस्लामिक लीडर नजर आता है.
 
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जाकिर के दिवानों की संख्या का अंदाजा इसी आंकड़े से लगाया जा सकता है कि 2012 में बिहार के किशनगंज में जाकिर की एक सभा हुई जिसमें 10 लाख से ज्यादा लोगों के शामिल होने का दावा किया गया. वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का आरोप है कि जाकिर लोगों को भड़काने का काम करते हैं न कि उपदेश देते हैं.
 
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जाकिर नाईक का जन्म 1965 में मुंबई में हुआ.  मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद जाकिर ने 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की. इस संस्था का मकसद था गैर मुस्लिमों को इस्लाम का सही मतलब समझाना. इसी मकसद से जाकिर ने खुद दुनिया भर में घूम घूम कर कुरान और इस्लाम पर लेक्चर देना शुरू कर दिया.
 
इंडिया न्यूज के खास शो अर्धसत्य में देखिए जाकिर नाईक के डॉक्टर से लेकर एक उपदेशक और अब अचानक से विवादों में आ गए हैं.