मथुरा. उत्तर प्रदेश के मथुरा में 280 एकड़ की सरकारी जमीन पर खुद को सत्याग्रही बताने वाले स्वाधीन भारत सुभाष सेना (SBSS) के कार्यकर्ताओं ने कब्जा कर रखा था. इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर जमीन खाली कराने गई पुलिस पर कार्यकर्ताओं ने हमला किया और फायरिंग शुरू कर दी. जिसमें एसपी सीटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव समेत 24 लोगों की मौत हो गई. इस फायरिंग में कुछ लोग भी घायल हो गए जिनका इलाज चल रहा है. इन सब उपद्रवियों की अगुवाई की थी रामवृक्ष यादव ने.  
 
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रामवृक्ष यादव के ठिकाने से क्या-क्या मिला?
पुलिस ने कार्रवाई के बाद जमीन तो खाली करा ली लेकिन यहां भारी मात्रा में कारतूस, राइफल और पिस्तौल बरामद की गईं. पुलिस ने प्वाइंट 315 बोर की 45 पिस्तौल, 12 की 2 पिस्तौल, प्वाइंट 315 बोर की 5 रायफलें और 80 जिंदा कारतूस, 12 बोर के 18 जिंदा कारतूस और प्वाइंट 320 बोर के 5 खोखे बरामद हुए. हथियारों का ये जखीरा वहां से बरामद होता है जहां जिले के सारे बड़े अधिकारियों के ऑफिस और उनके आवास पास मे ही हैं. 
 
कौन है रामवृक्ष यादव?
मथुरा में हुए बवाल का मुख्य आरोपी रामवृक्ष बाबा जयगुरुदेव का शिष्य हुआ करता था और उनकी जायदाद में हिस्से के लिए लंबी लड़ाई की. लेकिन जब वहां से कुछ नहीं मिला तो इसने अलग संगठन बना लिया. रामवृक्ष गाजीपुर के मरदह ब्लॉक के रायपुर बाघपुर गांव का रहने वाला था. 15 मार्च 2014 में वो करीब 200 लोगों को लेकर मथुरा आया था.  उसने यहां पर 2 दिन रहने के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी थी लेकिन दो दिन बाद वो वहां से हटा नही. 
 
पहले तो रामवृक्ष यहां एक झोपड़ी बनाकर रहने लगा फिर धीरे-धीरे वहां कई झोपडियां बन गईं. देखते ही देखते रामवृक्ष ने 280 एकड़ में अपनी सत्ता चलाने लगा. रामवृक्ष इनता ताकतवर हो गया कि प्रशासन भी इसका कुछ नहीं कर सकी. इमरजेंसी के दौरान 1975 में जेल में बंद भी रहा. रामवृक्ष को यूपी सरकार की ओर से लोकतंत्र सेनानी का पेंशन भी मिलता है. रामवृक्ष की दो बेटी और दो बेटे हैं.
 
इंडिया न्यूज के खास शो ‘अर्ध सत्य‘ में मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत बताएंगे कि  मथुरा कांड के पीछे का सच क्या है और कैसे रामवृक्ष यादव 200 लोगों को लेकर चलने वाले इंसान ने धीरे-धीरे 3000 लोग जुटाकर सत्ता चलाई.  
 
वीडियो पर क्लिक करके देखिए पूरा शो
 
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