नई दिल्ली. धरती की अपनी आवाज ‘ऊँ’ जैसी है यही बात श्रीश्री रविशंकर शंकर ने एक प्रवचन के दौरान कही. उन्होंने कहा, ”ऊँ शब्द की फ्रिक्वेंसी वही है जो धरती के घूमने की है. धरती की एक अपनी फ्रिक्वेंसी होती है जिस पर वो अपनी धुरी पर घूमती है.” ऊँ में मानव जाति की कई बातें छिपी होती हैं और आज इसी ऊँ पर विवाद छाया हुआ है.
 
योग दिवस यानि 21 जून को भारत सरकार के आयूष मंत्रालय ने योग करते समय ‘ऊँ’ मंत्र के जाप करने की बात कही है. लेकिन कुछ लोग और पार्टियों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ऊँ मंत्र का सांप्रदायिक करण कर रही है. 
 
मुस्लिम धर्मगुरु खालिद रशीद महली ने कहा है कि योगा से पहले ‘ऊँ’ का कहना केंद्र सरकार की तरफ से हम यह समझते हैं कि यह मुनासिब नहीं है क्योंकि भारत एक सेक्यूलर देश है और ऐसे देश का कोई धर्म नहीं होता. 
 
कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा है कि ‘ऊँ’ जो है वो हिंदू धर्म का सबसे पवित्र मंत्र है. आप उसका सांप्रदायिक करण कर रहे हो. 
इस देश में विवाद ढूंढना कोई बड़ी बात नहीं है अगर आप ऐसा नहीं कर पाए तो आपकी राजनीति बेकार है. आप किसी कोम और धर्म के दुश्मन हैं. कहा जाता है कि आप 10 सेकेंड के लिए आंख बंद करके ‘ऊँ’ शब्द को आवाज सुनिए फिर आपको ऐसा लगेगा जैसे आपके अंदर एक तरंग जा रही है. जो कई परेशानियों को दूर करता है.
 
रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘ऊँ’ किसी धर्म का शब्द नहीं है ये लगातार ब्रम्हांड में लगातार चलने वाली ध्वनी है. जहां बिल्कुल सुनाई नहीं देता वहां ये ध्वनी लगातार चलती रहती है. अंतरिक्ष में धरती की तरह कई ग्रह भी यही शब्द लगातार गूंजती रहती है. ऊँ किसी धर्म का शब्द नहीं है ये लगातार ब्रम्हांड में लगातार चलने वाली ध्वनी है. जहां बिल्कुल सुनाई नहीं देता वहां ये ध्वनी लगातार चलती रहती है. अंतरिक्ष में धरती की तरह कई ग्रह भी यही शब्द लगातार गूंजती रहती है.
 
इंडिया न्यूज के खास शो अर्ध सत्य में मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत आपको ‘ऊँ’ पर  देशभर में चल रही राजनीति से जुड़ी बातें बताएंगे. साथ ही इसपर हो रही राजनीति से भी रू-ब-रू कराएंगे.
 
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