कोटा. कोटा के कई कोचिंग सेंटरों में छात्रों की खुदकुशी की घटनाएं बढ़ती जा रही है. इन कोचिंग सेंटर से बच्चों के खुदकुशी करने की वजह और कोई नहीं बल्कि माता-पिता का छात्रों के ऊपर दबाव माना जाता है. 
 
रिपोर्ट्स के मुताबिक लाखों बच्चे कोचिंग के लिए कोटा आते हैं और यहां कोचिंग का कारोबार 2 हजार करोड़ के आस पास है. इस बीच माता-पिता के दबाव में यहां पढ़ने आए बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं. 
 
हाल ही में 40-50 छात्रों के गुट ने बिहार से मेडिकल की पढ़ाई करने आए छात्रों के साथ झड़प की. जिसमें एक छात्र प्रिंस की मौत हो गई. जानकारी के अनुसार मामला लड़की से जुड़े होने का माना जा रहा है. अब सवाल उठा है कि माता-पिता ने उसे पढ़ने तो भेज दिया लेकिन वह गलत रास्ते पर निकल पड़ा. 
 
यह तो रहा गलत राह पर जाने का मामला लेकिन कोटा में कुछ ऐसे छात्र भी हैं जो माता-पिता के दबाव की वजह से खुदकुशी का कदम उठा लेते हैं. गाजियाबाद की रहने वाली कीर्ति त्रिपाठी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ जिसने पांचवे माले से कूद कर खुदकुशी कर लिया.
 
17 साल की कीर्ति ने खुदकुशी नोट भी छोड़ा जिसमें उसने माता-पिता को सीख देते हुए लिखा कि मेरी छोटी बहन को उसकी मर्जी की पढ़ाई करने देना. इस बीच उसने अपने सुसाइड नोट में मानव संसाधन मंत्रालय से भी कोचिंग सेंटर्स को बंद करने की अपील की.
 
बता दें कि कोटा में न जाने ऐसे कितने बच्चे है जो माता-पिता के सपनों को पूरा करने के चक्कर में खुद को खत्म कर देते हैं. इंडिया न्यूज के खास शो ‘अर्ध सत्य’ में मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत की जुबानी जानिए सपनों की खुदकुशी के सच की पड़ताल.
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