नई दिल्ली. जल जीवन का एक आधार माना जाता है क्योंकि यह हमारे जीवन की अहम चीजों में से एक है. लेकिन देखा जाए तो भारत में जिस तरह से पानी की समस्या बन रही है, हो न हो भारत साल 2020 तक जलसंकट वाला देश बन जाएगा.
 
देश में जल स्तर दिन ब दिन घटता जा रहा है और मांग बढ़ती जा रही है. ताजा उदाहरण महाराष्ट्र का लातूर जिला है जहां पानी के लिए धारा 144 लगाई गई. यही नहीं महाराष्ट्र के नांदेर जिले में भी पानी की मारा- मारी देखी जाती रही है.
 
वहीं देश के ज्यादातर बड़े हिस्से पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं. चाहे वह महाराष्ट्र का विदर्भ हो या उत्तरप्रदेश का बुंदेलखंड. यहां लोगों को टैंकरों की सुविधा दी जाती है फिर भी पानी के खत्म होने का संकट दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है.
 
विदेशी कंपनियां बढ़ा रही है धंधा
एक तरफ देश में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है दूसरी तरफ पानी की बोतलें बेचने वाली कंपनियां देश में अपने धंधे का साम्राज्य फैलाए जा रही है. आकंड़ों के अनुसार ये कंपनियां भारत में सालाना 12 हजार करोड़ का धंधा करती है.
 
बात यही खत्म नहीं होती जानकारी के अनुसार कंपनियां भारत में एक बड़ा निवेश करने वाली है.
 
टैंकर माफिया भी कम नहीं
पानी को लेकर कंपनियों के धंधे के साथ ही देश के कई ऐसे बड़े इलाके है जहां पानी के लिए लोगों को टैंकर माफिया पर निर्भर होना पड़ता है. जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के लातूर इलाके में 400 लीटर का एक टैंकर 1200 रुपये का दिया जाता है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि इन टैंकर माफिया का न तो जनता विरोध कर पाती है न ही प्रशासन.
 
इंडिया न्यूज के खास शो अर्ध सत्य में मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत से जानिए कि कैसे भारत में पानी की समस्या बढ़ रही है? साथ ही पानी का धंधा कैसे अपने पैर पसार रहा है?
 
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